* उपसर्ग शब्द का अर्थ होता है – समीप आकर नया शब्द बनाना।
* उपसर्ग लगने के बाद शब्द का अर्थ बदल जाता है।
उपसर्ग के मुख्यतः पांच भेद होते हैं :
| संस्कृत के उपसर्ग-21 | हिंदी के उपसर्ग-12 | उर्दू और फ़ारसी के उपसर्ग-14 | अंग्रेजी के उपसर्ग | उपसर्ग की तरह प्रयुक्त होने वाले संस्कृत के अव्यय |
संस्कृत के कुल 21 उपसर्ग होते हैं। ये नीचे दिए गए हैं:
1. अति उपसर्ग : अति का अर्थ होता है ज़्यादा या अधिक।
उदाहरण : अतीन्द्रिय, अत्युक्ति, अत्युत्तम, अत्यावश्यक, अतीव, अतिकाल, अतिरेक, अत्यधिक, अत्यल्प, अतिक्रमण, अतिवृष्टि, अतिशीघ्र, अत्याचार आदि।
2. अनु उपसर्ग : अनु का अर्थ होता है बाद में या क्रम में।
उदाहरण : अनुरूप, अनुपात, अनुचर, अनुकरण, अनुसार, अनुशासन, अनुक्रमांक, अनुकंपा, अनुज,अनुशंसा, अन्वय, अन्वीक्षण, अन्वेषण, अनुच्छेद, अनूदित, अनुवाद, अनुस्वार, अनुशीलन, अनुकूल, अनुक्रम, अनुभव आदि।
3. अ उपसर्ग : अ का अर्थ होता है अभाव, अन, निषेध, नहीं, विपरीत।
उदाहरण : अथाह, अनाचार, अलौकिक, अस्वीकार, अन्याय, अशोक, अहिंसा, अवगुण, अर्जित, अधर, अपलक, अटल, अमर, अचल, अनाथ, अविश्वास, अधर्म, अचेतन, अज्ञान, अलग, अनजान, अनमोल, अनेक, अनिष्ट, आदि।
4. अप उपसर्ग : अप का अर्थ होता है बुरा, अभाव, विपरीत, हीनता या छोटा।
उदाहरण : अपव्यय, अपवाद, अपकर्ष, अपहरण, अपप्रयोग, अपशकुन, अपेक्षा, अपयश, अपमान, अपशब्द, अपराध, अपकार, अपकीर्ति, अपभ्रश आदि।
5. अभि उपसर्ग : अभि का अर्थ होता है सामने, पास, ओर, इच्छा प्रकट करना, चारों ओर।
जैसे:- अभिनन्दन, अभिलाप, अभीमुख, अभ्युत्थान,अभियान, अभिसार, अभ्यागत, अभ्यास, अभिशाप,अभिज्ञान, अभ्यास, अभ्युदय, अभिमान, अभिषेक,अभिनय, अभिनव, अभिवादन, अभिभाषण, अभियोग, अभिभूत, अभिभावक, अभ्यर्थी, अभीष्ट, अभ्यंतर आदि।
6. उप उपसर्ग : उप का अर्थ होता है निकट, छोटा, सहायक, सद्र्श, गौण, हीनता।
उदाहरण : उपाध्यक्ष,उपकूल, उपनिवेश, उपस्थिति, उपासना, उपदिशा, उपवेद, उपनेत्र, उपरांत, उपसंहार, उपकरण, उपकार, उपकार, उपग्रह, उपमंत्री, उपहार, उपदेश, उपवन, उपनाम, उपचार, उपसर्ग, उपयोग, उपभोग, उपभेद, उपयुक्त, उपेक्षा, उपाधि आदि।
7. अधि उपसर्ग : अधि का अर्थ होता है श्रेष्ठ, प्रधान, ऊपर, सामीप्य।
उदाहरण : अधिराज, अध्यात्म, अध्यक्ष, अधिनियम, अधिमास, अधिकृत, अधिक्षण, अध्यादेश, अधीन, अधीक्षक, अधिकार, अधिसूचना, अधिपति, अधिकरण, अधिनायक, अधिमान, अधिपाठक, अधिग्रहण, अधिवक्ता, आधिक्य, अध्धयन, अध्यापन आदि।
8. आ उपसर्ग : आ का अर्थ होता है ओर, सीमा, तक, से, समेत, थोडा, समीप, कभी ।
उदाहरण : आकाश, आरम्भ, आमुख, आरोहण, आजन्म, आयात, आगमन, आजीवन, आमरण, आचरण,आलेख, आहार, आकर्षण, आकर, आकार, आभार, आशंका, आवेश, आरक्त, आदान, आक्रमण, आकलन आदि।
9. प्रति उपसर्ग : प्रति का अर्थ होता है विरुद्ध, प्रत्येक, सामने, बराबरी, उल्टा, हर एक।
जैसे:- प्रतिवर्ष, प्रत्यपर्ण, प्रतिद्वंदी, प्रतिशोध, प्रतिरोधक, प्रतिघात, प्रतिध्वनी, प्रत्याशा, प्रतिकूल, प्रतिकार, प्रतिष्ठा, प्रत्येक, प्रतिहिंसा, प्रतिरूप, प्रतिध्वनी, प्रतिनिधि, प्रतीक्षा, प्रत्युत्तर, प्रतीत, प्रतिक्षण, प्रतिदान, प्रत्यक्ष आदि।
10. उत उपसर्ग : उत का अर्थ होता है श्रेष्ठ, ऊपर, ऊँचा।
जैसे:- उन्नति, उदघाटन, उत्तम, उत्पन्न, उत्पत्ति, उत्पीडन, उत्कंडा, उत्तम, उत्कृष्ट, उदय, उद्गम, उत्कर्ष, उत्पल, उल्लेख, उत्साह, उत्पात, उतीर्ण, उभ्दिज्ज, उल्लास, उज्ज्वल, उत्थान आदि।
11. प्र उपसर्ग : प्र का अर्थ होता है आगे, अधिक, ऊपर, यश।
जैसे:- र्थी, प्रक्रिया, प्रवाह, प्रख्यात, प्रकाश, प्रकट, प्रगति, प्रपंच, प्रलाप, प्रभुता, प्रपिता, प्रकोप, प्रभु, प्रयास, प्रकृति, प्रमुख,प्रदान, प्रचार, प्रसार, प्रहार, प्रयत्न, प्रभंजन, प्रपौत्र, प्रारम्भ, प्रोज्जवल, प्रेत, प्राचार्य, प्रयोजक, प्रमाण, प्रयोग, प्रताप, प्रबल आदि।
12. वि उपसर्ग : वि का अर्थ होता है विशिष्ट, भिन्न, हीनता,असमानता, अभाव।
जैसे:- विकास, विधवा, विवाद, विशेष, विस्मरण, विभाग, विकार, विमुख, विनय, विनंती, विफल, विसंगति, विवाह, विभिन्न,विश्राम, विरोध, विपक्ष, विदेश, विकल, वियोग, विनाश, विराम,विजय, विज्ञान, विलय, विहार, विख्यात, विधान, व्यवहार, व्यर्थ, व्यायाम, व्यंजन, व्याधि, व्यसन, व्यूह अदि।
13. सह उपसर्ग : सह का अर्थ होता है साथ।
जैसे:- सहोदर, सहपाठी, सहगान, सहचर, सहमती, सहयोग, सहमत आदि।
14. पर उपसर्ग : पर का अर्थ होता है अन्य।
जैसे:- परदेश, परलोक, पराधीन आदि।
15. सु उपसर्ग : परदेश, परलोक, पराधीन, श्रेष्ठ, साथ ।
उदाहरण : सुबोध, सुपुत्र,सुधार, सुगंध, सुगति, सुगन्ध, सुगति, सुबोध, सुयश, सुमन, सुलभ, सुअवसर, सूक्ति,सुदूर, सुजन, सुशिक्षित, सुपात्र, सुगठित, सुहाग, सुकर्म, सुकृत, सुभाषित, सुकवि, सुरभि आदि।
16. सम उपसर्ग : सम का अर्थ होता है अच्छा, पूर्णता, संयोग, उत्तम, साथ।
जैसे:- सम्मान, सम्मेलन,संकल्प, संचय, सन्तोष, संगठन, संचार, संलग्न, संहार, संशय, संरक्षा,संकल्प, संग्रह, संन्यास, संस्कार, संरक्षण, संहार, सम्मुख, संग्राम, संभव, संतुष्ट, संचालन, संजय, संताप, संभावना, संयोग, संशोधन आदि।
17. अव उपसर्ग : अव का अर्थ है हीन, बुरा,अनादर, पतन।
जैसे:- अवनति, अवज्ञा, अवधारण, अवगति, अवतार, अवलोकन, अवतरण, अवगत, अवस्था, अवनत, अवसान, अवरोहन, अवगणना, अवकृपा, अवशेष, अवगुण, अवकाश, अवसर आदि।
18. परि उपसर्ग : परि का अर्थ होता है चारों ओर, पास, आसपास।
जैसे:- परिमार्जन,परिहार, परिक्रमण, परिभ्रमण, परिधान,परिहास, परिश्रम, परिवर्तन, परीक्षा,पर्याप्त, पर्यटन, पर्यन्त,परिमित, परिपूर्ण, परिपाक, परिधि, परिवार, परिणाम, पर्यावरण, परिजन, परिक्रम, परिक्रमा, परिपूर्ण आदि।
19. निर उपसर्ग : निर का अर्थ होता है निषेध,रहित, बिना, बाहर।
जैसे:- निराहार, निरक्षर, निरादर, निरहंकार, निरामिष, निर्जर, निर्धन, निर्यात, निर्दोष, निरवलम्ब, नीरोग, नीरस, निरीह, निरीक्षण, निरंजन, निराषा, निर्गुण, निर्भय, निर्वास, निराकरण, निर्वाह, निदोष, निर्जीव, निर्मूल, निर्बल, निर्मल, निर्माण, निर्जन, निरकार, निरपराध आदि।
20. कु उपसर्ग : कु का अर्थ होता है बुरा, हीनता।
जैसे:- कुपुत्र, कुरूम, कुकर्म, कुमति,कुयोग, कुकृत्य,कुख्यात, कुखेत, कुपात्र, कुकाठ, कपूत, कुढंग आदि।
21. दुर उपसर्ग : दुर का अर्थ होता है कठिन, बुरा, विपरीत,दुष्ट, हीन।
उदारहण: दुरभिसंधि, दुर्गुण, दुर्दशा, दुर्घटना, दुर्भावना, दुरुह,दुरुक्ति, दुर्जन, दुर्गम, दुर्बल, दुर्लभ, दुखद, दुरावस्था, दुर्दमनीय, दुर्भाग्य, दुराशा, दुराग्रह, दुराचार, दुरवस्था, दुरुपयोग आदि।
हिंदी के कुल 12 उपसर्ग होते हैं। वे इस प्रकार हैं:
1. दु उपसर्ग : दु का अर्थ होता है बुरा, हीन, दो, विशेष, कम।
जैसे:- दुबला, दुर्जन, दुर्बल, दुलारा, दुधारू, दुसाध्य, दुरंगा, दुलत्ती, दुनाली, दुराहा, दुपहरी, दुगुना, दुकाल आदि।
2. अध् उपसर्ग : अध् का अर्थ होता है आधा।
जैसे:- अधपका, अधमरा, अधक्च्चा, अधकचरा, अधजला, अधखिला, अधगला, अधनंगा आदि।
3. अन उपसर्ग : अन का अर्थ होता है अभाव, निषेध, नहीं।
जैसे:- अनजान, अनकहा, अनदेखा, अनमोल, अनबन, अनपढ़, अनहोनी, अछूत, अचेत, अनचाहा, अनसुना, अलग, अनदेखी आदि।
4. उन उपसर्ग : उन का अर्थ होता है एक कम।
जैसे:- उनतीस, उनचास, उनसठ, उनहत्तर, उनतालीस, उन्नीस, उन्नासी आदि।
5. कु उपसर्ग : कु का अर्थ होता है बुरा, हिन्।
जैसे:- कुचाल, कुचैला, कुचक्र, कपूत, कुढंग, कुसंगति, कुकर्म, कुरूप, कुपुत्र, कुमार्ग, कुरीति, कुख्यात, कुमति आदि।
6. औ उपसर्ग : औ का अर्थ होता है हीन, अब, निषेध।
जैसे:- औगुन, औघर, औसर,औसान, औघट, औतार, औगढ़, औढर आदि।
7. अ उपसर्ग : अ का अर्थ होता है अभाव, निषेध।
जैसे:- अछुता, अथाह, अटल, अचेत आदि।
8. नि उपसर्ग : नि का अर्थ होता है रहित, अभाव, विशेष, कमी।
जैसे:- निडर, निक्कमा, निगोड़ा, निहत्था, निहाल आदि।
9. चौ उपसर्ग : चौ का अर्थ होता है चार।
जैसे:- चौपाई, चौपाया, चौराहा, चौकन्ना, चौमासा, चौरंगा, चौमुखा, चौपाल आदि।
10. उ उपसर्ग : उ का अर्थ होता है अभाव, हीनता।
जैसे:- उचक्का, उजड़ना, उछलना, उखाड़ना, उतावला, उदर, उजड़ा, उधर आदि।
11. पच उपसर्ग : पच का अर्थ होता है पांच।
जैसे:- पचरंगा, पचमेल, पचकूटा, पचमढ़ी आदि।
12. ति उपसर्ग : ति का अर्थ होता है तीन।
जैसे- तिरंगा, तिराहा, तिपाई, तिकोन, तिमाही आदि।
3. उर्दू एवं फ़ारसी के उपसर्ग :
उर्दू एवं फ़ारसी के 14 उपसर्ग होते है :
1.दर उपसर्ग : दर का अर्थ होता है में, मध्य में।
जैसे:- दरकिनार, दरमियान, दरअसल, दरकार, दरगुजर, दरहकीकत आदि।
2. कम उपसर्ग : कम का अर्थ होता है थोडा, हीन, अल्प।
जैसे:- कमजोर, कमबख्त, कमउम्र, कमअक्ल, कमसमझ, कमसिन आदि।
3. ला उपसर्ग : ला का अर्थ होता है नहीं, रहित।
जैसे:- लाइलाज, लाजवाब, लापरवाह, लापता,लावारिस, लाचार, लामानी, लाजवाल
4. ब उपसर्ग : ब का अर्थ होता है के साथ, और, अनुसार। उदारहण: बखूबी, बदौलत, बदस्तूर, बगैर, बनाम, बमुश्किल आदि।
5. बे उपसर्ग :बे का अर्थ होता है बिना।
जैसे:- बेनाम, बेपरवाह, बेईमान, बेरहम, बेहोश, बैचैन, बेइज्जत, बेचारा, बेवकूफ, बेबुनियाद,बेवक्त, बेतरह, बेअक्ल, बेकसूर, बेनामी, बेशक आदि।
6. बा उपसर्ग : बा का अर्थ होता है साथ से, सहित।
जैसे:- बाकायदा, बादत, बावजूद, बाहरो, बाइज्जत, बाअदब, बामौका, बाकलम, बाइंसाफ, बामुलाहिजा आदि।
7. बद उपसर्ग :बद का अर्थ होता है बुरा, हीनता।
जैसे:- बदनाम, बदमाश, बदतमीज, बदबू, बदसूरत, बदकिस्मत, बदहजमी, बददिमाग, बदमजा, बदहवास, बददुआ, बदनीयत, बदकार आदि।
8. ना उपसर्ग : ना का अर्थ होता है अभाव, नही ।
जैसे:- नालायक, नाकारा, नाराज, नासमझ, नाबालिक, नाचीज, नापसंद, नामुमकिन, नामुराद, नाकामयाब, नाकाम, नापाक आदि।
9. गैर उपसर्ग : गैर का अर्थ होता है भिन्न, निषेध।
जैसे:- गैरहाजिर, गैरकानूनी, गैरसरकारी, गैरजिम्मेदार, गैरमुल्क, गैरवाजिब, गैरमुमकिन, गैरमुनासिब आदि।
10. हम उपसर्ग : दर का अर्थ होता है आपस में, समान, साथ वाला।
जैसे:- हमराज, हमदर्द, हमजोली, हमनाम, हमउम्र, हमदम, हमदर्दी, हमराह, हमसफर आदि।
11. हर उपसर्ग : दर का अर्थ होता है सब, प्रत्येक।
जैसे:- हरलाल, हरसाल, हरवक्त,हररोज, हरघडी, हरएक, हरदिन, हरबार आदि।
12. खुश उपसर्ग : दर का अर्थ होता है अच्छा।
जैसे:- खुशनसीब, खुशमिजाज, खुशदिल, खुशहाल, खुशखबरी, खुशकिस्मत आदि।
13. सर उपसर्ग : सर का अर्थ होता है मुख्य।
जैसे:- सरताज, सरदार, सरपंच, सरकार, सरहद, सरगना आदि।
14. अल उपसर्ग : अल का अर्थ होता है अलमस्त, निश्चित, अंतिम।
जैसे:- अलबत्ता, अलबेला, अलविदा आदि।
1. हाफ उपसर्ग : हाफ का अर्थ होता है आधा।
जैसे:- हाफ पेंट, हाफ बाड़ी, हाफटिकट, हाफरेट, हाफकमीज आदि।
2. सब उपसर्ग : सब का अर्थ होता है अधीन, नीचे
जैसे:- सब पोस्टर, सब इंस्पेक्टर, सबजज, सबकमेटी, सबरजिस्टर आदि।
3. चीफ उपसर्ग : चीफ का अर्थ होता है प्रमुख
जैसे:- चीफ मिनिस्टर, चीफ इंजीनियर, चीफ सेक्रेटरी आदि।
4. जनरल उपसर्ग : जनरल का अर्थ प्रधान, सामान्य
जैसे:- जनरल मैनेजर, जनरल सेक्रेटरी, जनरल इंश्योरेंस आदि।
5. हैड उपसर्ग : हैड का अर्थ होता है मुख्य
जैसे:- हैड मुंशी, हैड पंडित, हेडमास्टर, हेड क्लर्क, हेड ऑफिस, हेड कांस्टेबल आदि।
6. डिप्टी उपसर्ग : डिप्टी का अर्थ होता है सहायक
जैसे:- डिप्टी कलेक्टर, डिप्टी रजिस्टर, डिप्टी मिनिस्टर आदि।
7. वाइस उपसर्ग : वाइस का अर्थ होता है सहायक
जैसे:- उप वाइसराय, वाइस चांसलर, वाइस प्रेजिडेंट, वाइस प्रिंसिपल आदि।
8. एक्स उपसर्ग : एक्स का अर्थ होता है मुक्त
जैसे:- एक्सप्रेस, एक्स कमिश्नर, एक्स स्टूडेंट, एक्स प्रिंसिपल आदि।
5. उपसर्ग के सामान प्रयुक्त होने वाले संस्कृत के शब्द
1. का उपसर्ग : एक्स का अर्थ होता है निषेध
जैसे:- कापुरुष आदि।
2. कु उपसर्ग : कु का अर्थ होता है हीन –
जैसे:- कुपुत्र आदि।
3. चिर उपसर्ग : चिर का अर्थ होता है बहुत देर
जैसे:- चिरकाल, चिरायु, चिरंतन, चिरंजीवी, चिरकुमार आदि।
4. अ उपसर्ग : अ का अर्थ होता है निषेध, अभाव
जैसे:- अधर्म, अनीति, अनन्त, अज्ञान, अभाव, अचेत, अशोक, अकाल आदि।
5. अन उपसर्ग : अन का अर्थ होता है निषेध
जैसे:- अनीति, अनन्त, अनागत, अनर्थ, अनादि आदि।
6. अंतर उपसर्ग : अंतर का अर्थ होता है भीतर
जैसे:- अन्तर्नाद, अन्तर्ध्यान, अंतरात्मा, अंतर्राष्ट्रीय, अंतर्जातीय आदि।
7. स उपसर्ग : स का अर्थ होता है सहित
जैसे:- सजल, सकल, सहर्ष आदि।
8. अध् उपसर्ग : अध् का अर्थ होता है नीचे
जैसे:- अध्:पतन, अधोगति, अधोमुख, अधोलिखित आदि।
9. पुरस उपसर्ग : पुरस का अर्थ होता है आगे
जैसे:- पुरस्कार, पुरस्कृत आदि।
10. पुनः उपसर्ग : पुनः का अर्थ होता है फिर
जैसे:- पुनर्गमन, पुनर्जन्म, पुनर्मिलन, पुनर्लेखन, पुनर्जीवन आदि।
11. पुरा उपसर्ग : पुरा का अर्थ होता है पुराना
जैसे:- पुरातत्व, पुरातन, पुरावृत आदि।
12. तिरस उपसर्ग : तिरस का अर्थ होता है बुरा, हीन
जैसे:- तिरस्कार, तिरोभाव आदि।
13. सत उपसर्ग : सत का अर्थ होता है श्रेष्ठ, सच्चा
जैसे:- सत्कार, सज्जन, सत्कार्य, सदाचार, सत्कर्म आदि।
14. अंत: उपसर्ग : अन्तः का अर्थ होता है भीतरी
जैसे:- अंत:करण, अंत:पुर, अंतर्मन, अंतर्देशीय आदि।
15. बहिर उपसर्ग : बहिर का अर्थ होता है बाहर
जैसे:- बहिर्गमन, बहिष्कार आदि।
16. सम उपसर्ग : सम का अर्थ होता है समान
जैसे:- समकालीन, समदर्शी, समकोण,समकालिक आदि।
17. सह उपसर्ग : सह का अर्थ होता है साथ
जैसे:- सहकार, सहपाठी, सहयोग, सहचर आदि।