काल/समय(Tense/Time)
काल का अर्थ होता है – समय।
काल:- क्रिया के जिस रूप से कार्य के होने के समय का बोध हो उसे काल कहते हैं।
अथवा- कार्य – व्यापार के समय और उसकी पूर्ण और अपूर्ण अवस्था के ज्ञान के रूपांतरण को काल कहते हैं।
जैसे:-सुनील गीता पढ़ता है।
रमेश कल दिल्ली जाएगा।
बच्चे खेल रहे हैं।
मैंडम पढ़ा रही थीं।
काल के भेद (3) :-
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भूतकाल (Past Tense) बिता हुए समय /कार्य समाप्त |
वर्तमान काल (Present Tense) कार्य जारी |
भविष्य काल (Future Tense) कार्य आने वाले समय में |
| सामान्य भूतकाल- |
कार्य बीते समय में पूर्ण (पहचान- आ, ई, ए, था, थी, थे) मैंने गाना गाया। खिलाडी खेलने गये। सीता गई। |
| आसन्न भूतकाल- |
कार्य तुरंत पूर्ण (पहचान- आ, ई, ए + है/हैं) मैंने सेब खाया है। अध्यापिका पढ़ाकर आयीं है। |
| पूर्ण भूतकाल- | कार्य काफी समय पहले पूर्ण (पहचान- या, ये, था, थी, थे, चूका था, चुकी थी, चुके थे) पद्मा ने नृत्य किया। |
| अपूर्ण भूतकाल- | कार्य पूर्ण नहीं (पहचान- रहा था, रही थी, रहे थे) मोहन बाजार जा रहा था| |
| संदिग्ध भूतकाल- |
कार्य पूर्ण होने में सन्देह (पहचान- गा, गे, गी) सीता घर गई होगी| वे क्रिकेट खेले होंगे। |
| हेतुहेतुमद् भूतकाल- |
कार्य हो सकता था लेकिन किसी कारणवस पूर्ण नहीं पहचान- मैं आगरा जाती तो ताजमहल देखती। |
| समयकालीन भूतकाल- | कार्य शुरू हुआ था लेकिन अभी जारी (पहचान- रहा था, रही थी, रहे थे) वे पिछले तीन घंटे से टीवी देख रहे थे। वे दो दिन से खेल रहे थे। |
वर्तमान काल के भेद(6)
| सामान्य वर्तमान काल | कार्य की पूर्णता और अपूर्णता का पता न (पहचान- ता है, ती है, ते है, ता हूँ, ती हूँ) वह घर जाता है| |
| अपूर्ण वर्तमान काल | कार्य के लगातार होने का पता (पहचान-हा है, रहे है, रही है, रहा हूँ) वह घर जा रहा है| |
| पूर्ण वर्तमान काल | कार्य के अभी पूरे होने का पता (पहचान- |
| संदिग्ध वर्तमान काल | कार्य के वर्तमान काल में होने या करने पर शक (पहचान- ता होगा, ती होगी, ते होंगे) वह जाती होगी| |
| तात्कालिक वर्तमान काल | कार्य वर्तमान में हो रहा है (पहचान-रहा है, रही है, रहा हूँ) वह जा रहा है| |
| संभाव्य वर्तमान काल | कार्य के पूरे होने की संभावना वह खाया हो| सीता गीत गयी हो| वह चलता हो। |
भविष्य काल के भेद(3)
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सामान्य भविष्य काल |
क्रिया के सामान्य रूप से भविष्य में होने का बोध (पहचान- ए गा, ए गी, ए गे) बच्चें खेलने जायेंगे| |
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संभाव्य भविष्य काल |
क्रिया के आगे कार्य होने या करने की संभावना का पता चले, शायद आज वर्षा हो। मैं सफल हऊँगा। |
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हेतुहेतुमद्भविष्य भविष्य काल |
एक कार्य का पूरा होना दूसरी आने वाले समय की क्रिया पर निर्भर हो, अगर राम आयेगा तो मैं जाऊँगा| |
भूतकाल :- क्रिया के जिस रूप से बीते हुए समय अथार्त क्रिया से कार्य के समाप्त होने का पता चले उसे भूतकाल कहते हैं।
उदाहरण:- रमेश पटना गया था।
पहले मैं लखनऊ में पढ़ता था।
राम ने रावण का वध किया था।
भूतकाल के प्रकार-(7)
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सामान्य भूतकाल- |
कार्य बीते समय में पूर्ण (पहचान- आ, ई, ए, था, थी, थे) मैंने गाना गाया। खिलाडी खेलने गये। सीता गई। |
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आसन्न भूतकाल- |
कार्य तुरंत पूर्ण (पहचान- आ, ई, ए + है/हैं) मैंने सेब खाया है। अध्यापिका पढ़ाकर आयीं है।मैं अभी सोकर उठा हूँ। |
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पूर्ण भूतकाल- |
कार्य काफी समय पहले पूर्ण (पहचान- या, ये, था, थी, थे, चूका था, चुकी थी, चुके थे) पद्मा ने नृत्य किया। |
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अपूर्ण भूतकाल- |
कार्य पूर्ण नहीं (पहचान- रहा था, रही थी, रहे थे) मोहन बाजार जा रहा था| |
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आसन्न भूतकाल- |
कार्य तुरंत पूर्ण (पहचान- आ, ई, ए + है/हैं) मैंने सेब खाया है। अध्यापिका पढ़ाकर आयीं है।मैं अभी सोकर उठा हूँ। |
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पूर्ण भूतकाल- |
कार्य काफी समय पहले पूर्ण (पहचान- या, ये, था, थी, थे, चूका था, चुकी थी, चुके थे) पद्मा ने नृत्य किया। |
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अपूर्ण भूतकाल- |
कार्य पूर्ण नहीं (पहचान- रहा था, रही थी, रहे थे) मोहन बाजार जा रहा था| |
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संदिग्ध भूतकाल- |
कार्य पूर्ण होने में सन्देह (पहचान- गा, गे, गी) सीता घर गई होगी| वे क्रिकेट खेले होंगे। |
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हेतुहेतुमद् भूतकाल- |
कार्य हो सकता था लेकिन किसी कारणवस पूर्ण नहीं पहचान- मैं आगरा जाती तो ताजमहल देखती। |
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समयकालीन भूतकाल- |
कार्य शुरू हुआ था लेकिन अभी जारी (पहचान- रहा था, रही थी, रहे थे) वे पिछले तीन घंटे से टीवी देख रहे थे। वे दो दिन से खेल रहे थे। |
सामान्य भूतकाल:- भूतकाल के क्रिया के जिस रूप से किसी कार्य के बीते समय में पूरा होने का बोध हो उसे सामान्य भूतकाल कहते है।
* इसमें भूतकाल की क्रिया के विशेष समय का बोध नहीं होता है।
* इसमें भूतकाल की क्रिया से यह पता चलता है की क्रिया का व्यापार बोलने से या लिखने से पहले हुआ।
* इसमें वाक्यों के अंत में आ, ई, ए, था, थी, थे इत्यादि लगे होते है।
जैसे :- मैंने गाना गाया। खिलाडी खेलने गये। श्रीराम ने रावण को मारा। वह स्कूल गया। मैंने समाचार देखा। श्याम ने पत्र लिखा।
आसन्न भूतकाल :- भूतकाल के क्रिया के जिस रूप से किसी कार्य के अभी कुछ समय पहले ही पूर्ण होने का बोध हो उसे आसन्न भूतकाल कहते है।
* आसन्न का अर्थ होता है –निकट/अभी-अभी। अर्थात इसमें क्रिया के रूप से किसी कार्य/व्यापार के अभी-अभी या निकट समय में पूरा होने का बोध होता है|
जैसे :- मैं अभी हिसार से आया हूँ। अध्यापिका पढ़ाकर आयीं है। मैं अभी सोकर उठा हूँ। सिपाही ने चोर को पकड़ लिया।
पूर्ण भूतकाल :- भूतकाल के क्रिया के जिस रूप से किसी कार्य के समाप्त हुए बहुत समय बीत चूका हो उसे पूर्ण भूतकाल कहते है।
* इसमें कार्य के पूर्ण होने का स्पष्ट बोध होता है तथा इस वाक्यों के अंत में या, ये, था, थी, थे, चूका था, चुकी थी, चुके थे आदि लगे होते है|
जैसे :- पद्मा ने नृत्य किया। अर्जुन ने कर्ण को मारा था। राधा ने गीत गया था। भारत 15 अगस्त 1947 को आजाद हुआ था।
अपूर्ण भूतकाल :- भूतकाल के क्रिया के जिस रूप से पता चले की कोई कार्य भूतकाल में पूरा नहीं हुआ था अपितु नियमित रूप से जारी रहा, उसे अपूर्ण भूतकाल कहते है।
* इसमें कार्य भूतकाल में शुरू होने का बोध होता है लेकिन खत्म होने का पता न चलता है|
* इनके वाक्यों के अंत में रहा था, रही थी, रहे थे आदि लगे होते है|
जैसे :- मोहन मैदान में घूम रहा था। वह हॉकी खेल रहा था। सुनील पढ़ रहा था। राहुल लिख रहा था। बच्चे खेल रहे थे। सुरेश गीत गा रहा था।
संदिग्ध भूतकाल :- भूतकाल के क्रिया के जिस रूप से कार्य के भूतकाल में पूरा होने पर संदेह हो की वह पूरा हुआ था या नहीं उसे संदिग्ध भूतकाल कहते है।
* इन वाक्यों के अंत में गा, गे, गी आदि लगे होते है|
जैसे :- सुनील हिसार गया था।
वे क्रिकेट खेले होंगे। बस छूट गई होगी।
तू गाया होगा। उसने खाया होगा।
ललिता चली गई होगी।
श्याम ने पत्र लिखा होगा।
हेतुहेतुमद् भूतकाल :- भूतकाल के क्रिया के जिस रूप से यह पता चले कि कार्य हो सकता था लेकिन दूसरे कार्य की वजह से हुआ नहीं उसे हेतुहेतुमद् भूतकाल कहते है।
* इसमें पहली क्रिया दूसरी क्रिया पर निर्भर होती है। पहली क्रिया तो पूरी नहीं होती लेकिन दूसरी भी पूरी नहीं हो पाती।
जैसे :- मैं आगरा जाती तो ताजमहल देखती।
सुरेश मेहनत करता तो सफल हो जाता।
यदि वर्षा होती तो फसल अच्छी होती।
यदि मैं आता तो वह चला जाता।
समयकालीन भूतकाल :- भूतकाल के क्रिया के जिस रूप से पता चले की कोई कार्य भूतकाल में निश्चित समय से शुरू हुआ था तथा अभी नियमित रूप से जारी हो, उसे समयकालीन भूतकाल कहते है।
* इन वाक्यों के अंत में रहा था, रही थी, रहे थे आदि आते हैं और समय का निश्चित बोध होता है|
जैसे :- वे पिछले तीन घंटे से टीवी देख रहे थे। वे दो दिन से खेल रहे थे।
* इन वाक्यों के अंत में ता, ती, ते, है, हैं लगा होता है|
* इसमें क्रिया के रूप से किसी कार्य के निरन्तर होते रहने का बोध होता है|
जैसे :- राम अभी - अभी आया है। वर्षा हो रही है।
राजू गाता है। मोहन पढ़ रहा है।
पुजारी पूजा कर रहा है।
राम पढ़ता है। मुनि माला फेरता है।
वर्तमान काल के भेद(6)
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सामान्य वर्तमान काल |
कार्य की पूर्णता और अपूर्णता का पता न (पहचान- ता है, ती है, ते है, ता हूँ, ती हूँ) वह घर जाता है| |
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अपूर्ण वर्तमान काल |
कार्य के लगातार होने का पता (पहचान-हा है, रहे है, रही है, रहा हूँ) वह घर जा रहा है| |
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पूर्ण वर्तमान काल |
कार्य के अभी पूरे होने का पता (पहचान- या है, ये है, चूका है, चूकी है चूका हूँ) वह घर गया| |
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संदिग्ध वर्तमान काल |
कार्य के वर्तमान काल में होने या करने पर शक (पहचान- ता होगा, ती होगी, ते होंगे) वह जाती होगी| |
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तात्कालिक वर्तमान काल |
कार्य वर्तमान में हो रहा है (पहचान-रहा है, रही है, रहा हूँ) वह जा रहा है| |
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संभाव्य वर्तमान काल |
कार्य के पूरे होने की संभावना वह खाया हो| सीता गीत गयी हो| वह चलता हो। |
सामान्य वर्तमान काल :- वर्तमान काल के क्रिया के जिस रूप से किसी कार्य की पूर्णता और अपूर्णता का पता न चले उसे सामान्य वर्तमान काल कहते हैं।
* इसमें क्रिया से क्रिया के सामान्य रूप का वर्तमान में होने का पता चलता है|
* इन वाक्यों के अंत में ता है, ती है, ते है, ता हूँ, ती हूँ आदि लगा है|
जैसे :- राम घर जाता है। वह गेंद खेलता है।
सीता पढती है। मैं गाता हूँ।
वह आता है। हवा चलती है।
कमल पड़ता है। बच्चा रोता है।
अपूर्ण वर्तमान काल :- अपूर्ण का अर्थ होता है – अधुरा।
वर्तमान काल के क्रिया के जिस रूप से किसी कार्य के लगातार होने का पता चलता है उसे अपूर्ण वर्तमान काल कहते है।
* इसके वाक्यों के अंत में रहा है, रहे है, रही है, रहा हूँ आदि लगता है|
जैसे :- श्याम गेंद खेल रहा है। वह घर जा रहा है।अनीता गीत गा रही है।
रमेश लिख रहा है। बन्दर नाच रहा है। कमल पत्र लिख रहा है।
पूर्ण वर्तमान काल :- वर्तमान काल के क्रिया के जिस रूप से किसी कार्य के अभी पूरे होने का पता चलता है। उसे पूर्ण वर्तमान काल कहते है।
* इसमें हमें कार्य की पूर्ण सिद्धि तथा क्रिया के व्यापार के तत्काल पूरे होने के बारे में पता चलता है।
जैसे :- मैंने फल खाए हैं। उसने गेंद खेली है। वह आया है।
नकर आया है। पत्र भेजा गया है।
संदिग्ध वर्तमान काल:- वर्तमान काल के क्रिया के जिस रूप से किसी कार्य के वर्तमान काल में होने या करने पर शक हो उसे संदिग्ध वर्तमान काल कहते है।
* इसके वाक्यों के अंत में ता होगा, ती होगी, ते होंगे आदि होते है|
जैसे :- सविता पत्र लिखती होगी। वह गाता होगा।
राम खाता होगा। रमेश जाता होगा।
गाड़ी आती होगी। बच्चा रोता होगा।
तात्कालिक वर्तमान काल :- वर्तमान काल के क्रिया के जिस रूप से यह पता चले कि कोई कार्य वर्तमान में हो रहा है उसे तात्कालिक वर्तमान काल कहते हैं।
* इसमें बोलते समय क्रिया का व्यापार चलता रहता है तथा इसकी पूर्णता का पता नहीं चलता है।
जैसे :- मैं पढ़ रहा हूँ। वह जा रहा है। हम कपड़े पहन रहे हैं।
संभाव्य वर्तमान काल :- संभाव्य का अर्थ होता है संभावित या जिसके होने की संभावना हो।
वर्तमान काल के क्रिया के जिस रूप से किसी कार्य के पूरे होने की संभावना होती है उसे संभाव्य वर्तमान काल कहते हैं।
जैसे :- वह आया हो। वह लौटा हो। वह चलता हो। उसने खाया हो।
भविष्य काल
* इन वाक्यों के अंत में गा, गे, गी आदि लगे होते है।
जैसे :- मैं कल विद्यालय जाउँगा। खाना कुछ देर में बन जायेगा। राजू देर तक पढ़ेगा।
वह आम लायेगा। वह किताब पढ़ेगा। हम सर्कस देखने जायेंगे। राम कल पढ़ेगा।
कमला नाचेगी। श्याम पत्र लिखेगा।
भविष्य काल के भेद(3)
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सामान्य भविष्य काल |
क्रिया के सामान्य रूप से भविष्य में होने का बोध (पहचान- ए गा, ए गी, ए गे) बच्चें खेलने जायेंगे| |
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संभाव्य भविष्य काल |
क्रिया के आगे कार्य होने या करने की संभावना का पता चले, शायद आज वर्षा हो। मैं सफल हऊँगा। |
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हेतुहेतुमद्भविष्य भविष्य काल |
एक कार्य का पूरा होना दूसरी आने वाले समय की क्रिया पर निर्भर हो, अगर राम आयेगा तो मैं जाऊँगा| |
सामान्य भविष्य काल :- भविष्य काल के क्रिया के जिस रूप से क्रिया के सामान्य रूप से भविष्य में होने का बोध हो उसे सामान्य भविष्य काल कहते है।
* इसके वाक्यों के अंत में ए गा, ए गी, ए गे आदि लगे होते है|
जैसे :- वह खाना खाएगी। बच्चे खेलने जायेंगे।
वह घर जायेगा। राम आएगा।
दीपक अख़बार बेचेगा। वह पढ़ेगा।
संभाव्य भविष्य काल :- भविष्य काल के क्रिया के जिस रूप से क्रिया के आगे कार्य होने या करने की संभावना का पता चले उसे संभाव्य भविष्य काल कहते हैं।
* इसमें क्रियाओं का निश्चित पता नहीं चलता। इसमें भविष्य में किसी कार्य के होने की संभवना होती है।
जैसे :- शायद कल सुनील आगरा जाए।
शायद आज वर्षा हो। शायद चोर पकड़ा जायेगा।
परीक्षा में शायद मुझे दो अंक प्राप्त हों। मैं सफल हऊँगा।
हेतुहेतुमद्भविष्य भविष्य काल:- भविष्य काल के क्रिया के जिस रूप से एक कार्य का पूरा होना दूसरी आने वाले समय की क्रिया पर निर्भर हो उसे हेतुहेतुमद्भविष्य भविष्य काल कहते है।
* इसमें एक क्रिया दूसरी पर निर्भर होती है। इसमें एक क्रिया का होना दूसरी क्रिया पर निर्भर होता है।
जैसे :- यदि छुट्टियाँ होंगी तो मैं आगरा जाउँगा।
अगर तुम मेहनत करोगे तो फल अवश्य मिलेगा।
वह आये तो मैं जाऊ। वह कमाए तो मैं खाऊ।
जो कमाए सो खाए। वह पढ़ेगा तो सफल होगा।
यदि शत्रु हमला करेगा तो मुंह की खायेगा।