8507770022

लिंग - Gender

लिंग:- लिंग (संस्कृत का शब्द) अर्थ - निशान।

जिस संज्ञा शब्द से व्यक्ति की जाति (पुरुष या स्त्री)  का बोध हो उसे लिंग कहते है।

पुरुष जाति में = बैल , बकरा , मोर , मोहन , हाथी , शेर , घोडा , दरवाजा , पंखा , कुत्ता , भवन , पिता आदि।

स्त्री जाति में = गाय , बकरी , मोरनी , मोहिनी , हथनी , शेरनी , घोड़ी , खिड़की , कुतिया , माता आदि।

लिंग के निर्माण में आई कठिनाई और उसका हल :-

हिंदी में लिंग के निर्णय का आधार संस्कृत के नियम ही हैं। संस्कृत में हिंदी से अलग एक तीसरा लिंग भी है जिसे नपुंसकलिंग कहते हैं।

* नपुंसकलिंग में अप्राणीवाचक संज्ञाओं को रखा जाता है।

* कुछ पुल्लिंग शब्दों के पर्यायवाची स्त्रीलिंग हैं और कुछ स्त्रीलिंग के पुल्लिंग।

जैसे :- पुस्तक को स्त्रीलिंग कहते हैं और ग्रन्थ को पुल्लिंग।

हिंदी में लिंग :-

लिंग निर्णय के कुछ नियम इस प्रकार है :-

1. जब प्राणीवाचक संज्ञा पुरुष जाति का बोध कराएँ तो वे पुल्लिंग होते हैं और जब स्त्रीलिंग का बोध कराएँ तो स्त्रीलिंग होती हैं।
जैसे :- कुत्ता , हाथी , शेर पुल्लिंग हैं और कुत्तिया , हथनी , शेरनी स्त्रीलिंग हैं।

2. कुछ प्राणीवाचक संज्ञा जब पुरुष और स्त्री दोनों लिंगों का बोध करती है तो वे नित्य पुल्लिंग में शामिल हो जाते हैं।
जैसे :- खरगोश , खटमल , गैंडा , भालू , उल्लु आदि।

3. कुछ प्राणीवाचक संज्ञा जब पुरुष और स्त्री दोनों का बोध करे तो वे नित्य स्त्रीलिंग में शामिल हो जाते हैं।
जैसे :- कोमल , चील , तितली , छिपकली आदि।

लिंग के भेद :-

1. पुल्लिंग
2. स्त्रीलिंग
3. नपुंसकलिंग

1. पुल्लिंग क्या होता है :-

जिन संज्ञा के शब्दों से पुरुष जाति का पता चलता है उसे पुल्लिंग कहते हैं।
जैसे :- पिता , राजा , घोडा , कुत्ता , बन्दर , हंस , बकरा , लडकी , आदमी, सेठ , मकान , लोहा , चश्मा , दुःख , प्रेम , लगाव , खटमल , फूल , नाटक , पर्वत , पेड़ , मुर्गा , बैल , भाई , शिव , हनुमान , शेर आदि।

पुल्लिंग अपवाद :-
पक्षी , फरवरी , एवरेस्ट , मोतिया , दिल्ली , स्त्रीत्व आदि।

पुल्लिंग की पहचान :-
1. जिन शब्दों में अ , त्व , आ , आव , पा , पन , न, दान , खाना , वाला आदि प्रत्यय जुड़ा हो  वे पुल्लिंग होते हैं।

जैसे :- मन , तन , वन , शेर , सतीत्व , देवत्व , मोटापा , चढ़ाव , बुढ़ापा , लडकपन , बचपन , लेन -देन

 खानदान , पीकदान , दवाखाना , जेलखाना , दूधवाला , दुकानवाला आदि।

2. रत्न, पर्वत, सागर, द्वीप के नाम पुल्लिंग होते हैं 

रत्नों के नाम भी पुल्लिंग होते हैं।

जैसे :- नीलम , पुखराज , मूँगा , माणिक्य , पन्ना , मोती , हीरा आदि।

 पर्वतों के नाम पुल्लिंग होते हैं ।

जैसे :- हिमालय , हिमाचल , विघ्यांच्ल , सतपुड़ा , आल्प्स , यूराल , कंचनजंगा , एवरेस्ट , फूजियामा , कैलाश , मलयाचल , माउन्ट एवरेस्ट आदि।

सागर के नाम पुल्लिंग होते हैं।

जैसे :- हिन्द महासागर , प्रशांत महासागर , अरब महासागर आदि।

द्वीप भी पुल्लिंग होते हैं।

जैसे :- अंडमान -निकोबार , जावा , क्यूबा , न्यू फाउंलैंड आदि।

3. ग्रह, तारा के नाम पुल्लिंग होते हैं

ग्रहों, तारों  के नाम पुल्लिंग होते हैं :-

जैसे :- शनि , बुद्ध , बृहस्पति , मंगल , शुक्र  , सूर्य , चन्द्र , राहू , आकाश आदि।

4. समय, दिन, महिना, देश के नाम पुल्लिंग होते हैं

समय के नाम पुल्लिंग होते हैं।

जैसे :- घंटा , पल , क्षण , मिनट , सेकेंड आदि।

दिनों के नाम पुल्लिंग होते हैं :-

जैसे :- सोमवार , मंगलवार , बुद्धवार , वीरवार , शुक्रवार , शनिवार , रविवार आदि।

महीनों के नाम पुल्लिंग होते हैं।

जैसे :- फरवरी , मार्च , चैत , आषाढ़ , फागुन आदि।

देशों के नाम पुल्लिंग होते हैं :-

जैसे :- भारत , चीन , ईरान , यूरान , रूस , जापान , अमेरिका , पाकिस्तान , उत्तर प्रदेश , हिमाचल , मध्य प्रदेश आदि।

5. द्रव, धातु के नाम पुल्लिंग होते हैं

धातुओं के नाम पुल्लिंग होते हैं :-

जैसे :- सोना , ताम्बा , पीतल , लोहा ,चाँदी , पारा आदि।

द्रवों के नाम पुल्लिंग होते हैं।

जैसे :- पानी , तेल , पेट्रोल , घी , शरबत , दही , दूध आदि।

6. पेड़, अनाज, फूल के नाम पुल्लिंग होते हैं

पेड़ों के नाम पुल्लिंग होते हैं।

जैसे :- केला , पपीता , शीशम , सागौन , जामुन , बरगद , पीपल , नीम , आम , अमरुद , देवदार , अनार , अशोक , पलाश आदि।

अनाजों के नाम भी पुल्लिंग होते हैं।

जैसे :- गेंहूँ , बाजरा , चना , जौ आदि।

फूलों के नाम पुल्लिंग होते हैं।

जैसे :- गेंदा , मोतिया , कमल , गुलाब आदि।

7. वर्णमाला के अक्षरों के नाम पुल्लिंग होते हैं।

जैसे :- अ , उ , ए , ओ , क , ख , ग , घ , च , छ , य , र , ल , व् , श आदि।

8. शरीर के अंग पुल्लिंग होते हैं।

जैसे :- हाथ , पैर , गला , अंगूठा , कान , सिर , मुंह , घुटना , ह्रदय , दांत , मस्तक आदि।

अपवाद- आँख , नाक , जीभ , पलक , उँगली , ठोड़ी आदि ।

9. प्राणीवाचक शब्द हमेशा पुरुष जाति का ही बोध करते हैं।

जैसे :- बालक , गीदड़ , कौआ , कवि , साधु , खटमल , भेडिया , खरगोश , चीता , मच्छर , पक्षी आदि।

10. आकारान्त संज्ञा पुल्लिंग होती है।

जैसे :- गुस्सा , चश्मा , पैसा , छाता आदि।

11. समूह वाचक संज्ञा भी पुल्लिंग होती है।

जैसे :- मण्डल , समाज , दल , समूह , सभा , वर्ग , पंचायत आदि।

12. भारी और बेडौल वस्तु भी पुल्लिंग होती हैं।

जैसे :- जूता , रस्सा , पहाड़ , लोटा आदि।

पुल्लिंग शब्द और उनके प्रयोग इस प्रकार हैं :-

1. प्राण – उसके प्राण उड़ गये।
2. घी – घी महँगा है।
3. अपराध – उनका अपराध क्षमा के योग्य है।
4. अकाल – राजस्थान में भीषण अकाल पड़ा था।
5. आईना – आईना टूट गया।
6. आयोजन – पूजा का आयोजन हो रहा है।
7. अम्बार – किताबों का अम्बार लगा हुआ है।
8. आँसू – मोहन के आँसू निकल पड़े।
9. इत्र – यह जैस्मिन का इत्र है।
10. ईंधन – ईंधन जला दिया गया।
11. कंबल – कंबल बहुत मोटा है।
12. कफन – कफन थोडा छोटा है।
13. कवच – यह सूअर की खाल का कवच है।
14. कीचड़ – कीचड़ सुख गया।
15. कुआँ – कुआँ गहरा है।

2. स्त्रीलिंग क्या होता है :-

जिन संज्ञा शब्दों से स्त्री जाति का पता चलता है उसे स्त्रीलिंग कहते हैं ।

जैसे :- हंसिनी , लडकी , बकरी , माता , रानी , जूं , सुईं , गर्दन , लज्जा , बनावट , घोड़ी , कुतिया , बंदरिया , कुर्सी , पत्ती , नदी , शाखा , मुर्गी , गाय , बहन , यमुना , बुआ , लक्ष्मी , गंगा , लडकी , औरत , शेरनी , नारी , झोंपड़ी , लोमड़ी आदि ।

स्त्रीलिंग के अपवाद :-

जैसे :- जनवरी , मई , जुलाई , पृथ्वी , मक्खी , ज्वार , अरहर , मूंग , चाय , काफी , लस्सी , चटनी , इ , ई , ऋ , जीभ , आँख , नाक , उँगलियाँ , सभा , कक्षा , संतान , प्रथम , तिथि , छाया , खटास , मिठास , आदि ।

जब पुल्लिंग शब्दों को स्त्रीलिंग बनाया जाता है तब प्रत्ययों को शब्दों में जोड़ा जाता है जिन्हें स्त्रीलिंग प्रत्यय कहते हैं ।

पुल्लिंग + स्त्रीलिंग प्रत्यय (ई/इनी/इन/नि/आनी/ आइन/इया) = स्त्रीलिंग

जैसे :-

ई = बड़ा – बड़ी , भला – भली आदि ।
इनी = योगी – योगिनी , कमल – कमलिनी आदि ।
इन = धोबी – धोबिन , तेल – तेली आदि ।
नि = मोर – मोरनी , चोर – चोरनी आदि ।
आनी = जेठ – जेठानी , देवर – देवरानी आदि ।
आइन = ठाकुर – ठकुराइन , पंडित – पण्डिताइन आदि ।
इया = बेटा – बिटिया , लोटा – लुटिया आदि ।

स्त्रीलिंग की पहचान :-

1. जिन संज्ञा शब्दों के पीछे ख , ट , वट , हट , आनी आदि आयें वे सभी स्त्रीलिंग होते हैं ।

जैसे :- कडवाहट , आहट , बनावट , शत्रुता , मूर्खता , मिठाई , छाया , प्यास , ईख , भूख , चोख , राख , कोख , लाख , देखरेख , झंझट , आहट , चिकनाहट , सजावट , इन्द्राणी , जेठानी , ठकुरानी , राजस्थानी आदि ।

2. अनुस्वारांत , ईकारांत , उकारांत , तकारांत , सकारांत आदि संज्ञाएँ आती है वे स्त्रीलिंग होते हैं ।
जैसे :- रोटी , टोपी , नदी , चिट्ठी , उदासी , रात , बात , छत , भीत , लू , बालू , दारू , सरसों , खड़ाऊं , प्यास , वास , साँस , नानी , बेटी , मामी , भाभी आदि ।

3. भाषा , बोलियों तथा लिपियों के नाम स्त्रीलिंग होती हैं :-

जैसे :- हिंदी , संस्कृत , देवनागरी , पहाड़ी , अंग्रेजी ,पंजाबी गुरुमुखी , फ्रांसीसी , अरबी ,फारसी, ज़र्मन ,बंगाली , रुसी आदि ।

4. तरीखो और तिथियों के नाम स्त्रीलिंग होते हैं ।

जैसे :- पहली , दूसरी , प्रतिपदा , पूर्णिमा , पृथ्वी , अमावस्या , एकादशी , चतुर्थी , प्रथमा आदि ।

5. राशि, नक्षत्र, नदी के नाम स्त्रीलिंग होते है-

नदियों के नाम स्त्रीलिंग होते हैं :-

जैसे :- गंगा , यमुना , गोदावरी , सरस्वती , रावी , कावेरी , कृष्णा , व्यास , सतलुज , झेलम , ताप्ती , नर्मदा आदि।

राशि के नाम स्त्रीलिंग होते हैं ।

जैसे :- कुम्भ , मीन , तुला , सिंह , मेष , कर्क आदि ।

नक्षत्रो के नाम स्त्रीलिंग होते हैं ।

जैसे :- अश्विनी , भरणी , रोहिणी , रेवती , मृगशिरा , चित्रा आदि ।

6. समूहवाचक संज्ञा स्त्रीलिंग होते हैं ।

जैसे :- भीड़ , कमेटी , सेना , सभा , कक्षा आदि ।

7. प्राणीवाचक संज्ञा स्त्रीलिंग होती हैं ।

जैसे :- धाय , संतान , सौतन आदि ।

8. पुस्तकों के नाम स्त्रीलिंग होते हैं ।

जैसे :- कुरान , रामायण , गीता , रामचरितमानस , बाइबल , महाभारत आदि ।

9. आहारों के नाम स्त्रीलिंग होते हैं ।

जैसे :- सब्जी , दाल , कचौरी , पूरी , रोटी , पकोड़ी आदि ।

10. शरीर के अंगों के नाम स्त्रीलिंग होते हैं ।

जैसे :- आँख , नाक , जीभ , पलक , उँगली , ठोड़ी आदि ।

11. अभुष्ण और वस्त्रों के नाम स्त्रीलिंग होते हैं ।

जैसे :- साड़ी , सलवार , चुन्नी , धोती , टोपी , पेंट , कमीज , पगड़ी , माला , चूड़ी , बिंदी , कंघी , नथ , अंगूठी आदि ।

12. मशालों के नाम भी स्त्रीलिंग होते हैं ।

जैसे :- दालचीनी , लौंग , हल्दी , मिर्च , धनिया , इलायची , अजवाइन , सौंफ , चाय आदि ।

13. हमेशा स्त्रीलिंग रहने वाली संज्ञा होती हैं ।

जैसे :- मक्खी , कोयल , मछली , तितली , मैना आदि ।

स्त्रीलिंग के शब्द और प्रयोग इस प्रकार हैं :-

1. आदत – मुझे शराब पीने की आदत है ।
2. आय – मेरी आय ठीक है ।
3. आँख – उनकी आँख बहुत छोटी – छोटी हैं ।
4. आग – घर में आग लग गई ।
5. इच्छा – मेरी इच्छा सोने की हैं ।
6. ईट – ईंट बिलकुल पक चुकी है ।
7. ईर्ष्या – दूसरों से ईर्ष्या नहीं करनी चाहिए ।
8. उम्र – तुम्हारी उम्र लंबी है ।
9. ऊब – नीरस बातों से ऊब होती है ।
10. कब्र – कब्र खोदी जा चुकी है ।
11. कमर – मेरी कमर में बहुत दर्द है ।
12. कसम – मैंने उनकी कसम खायी है ।
13. कलम – कलम टूट चुकी है ।
14. खटिया – उसकी तो खटिया खड़ी हो गई ।
15. खोज – गुमशुदा व्यक्तियो की खोज अभी तक जारी है ।
नोट :- आपको जिस संज्ञा शब्द का लिंग बदलना है पहले उसका बहुवचन में परिवर्तन कीजिए । बहुवचन में बदलने के बाद अगर शब्द के पीछे ऍ या आँ आये तो वो स्त्रीलिंग है और अगर पीछे ऍ और आँ नहीं आता है तो वह पुल्लिंग होगा ।

जैसे :-

पंखा – पंखे = आँ या ऍ नहीं आया है तो यह पुल्लिंग है ।
चाबी – चाबियाँ = आँ आया है तो यह स्त्रीलिंग हैं ।

शब्दों का लिंग परिवर्तन इस प्रकार है :-

कवि = कवियित्री

विद्वान् = विदुषी

महान = महती

साधु = साध्वी

पंडित = पण्डिताइन

अध्यापक = अध्यापिका

नर = मादा

बाल = बाला

सम्राट = सम्राज्ञी

सुत = सुता

सेवक = सेविका

तपस्वी = तपस्विनी

वर = वधू

दर्जी = दर्जिन

भेड़ = भेडा

पडोस = पड़ोसिन

नर तितली = तितली

भेडिया = मादा भेडिया

कछुआ = मादा कछुआ

नर चील = चील

नर चीता = चीता

भालू = मादा भालू

माली = मालिन

कहार = कहारिन

ब्राह्मण = ब्राह्मणी

चिड़ा = चिड़िया

सिंह = सिंहनी

ठाकुर = ठकुराइन

नेता = नेत्री

पाठक = पाठिका

युवक = युवती

नर मक्खी = मक्खी

लोटा = लुटिया हाथी = हथिनी

शिष्य = शिष्या

ग्वाला = ग्वालिन

स्वामी = स्वामिनी

खरगोश = मादा खरगोश

परोपकारी = परोपकारिनी

नर मछली = मछली

हितकारी = हितकारिनी

बलवान = बलवती

पुल्लिंग से स्त्रीलिंग बनाने के नियम इस प्रकार हैं :-

1. अ, आ पुल्लिंग शब्दों को जब ‘ ई ‘ कर दिया जाता है तो वे स्त्रीलिंग हो जाते हैं ।
पुल्लिंग = स्त्रीलिंग के उदहारण इस प्रकार हैं :-

गूँगा = गूँगी

गधा = गधी

नर = नारी

नाला = नाली

कबूतर = कबूतरी

काला = काली

नट = नटी

साला = साली

2. अ, आ, वा आदि पुल्लिंग शब्दों में ‘इया’ जोड़ कर स्त्रीलिंग बनाया जाता हैं ।

पुल्लिंग = स्त्रीलिंग के उदहारण इस प्रकार हैं :-

लोटा = लुटिया बन्दर = बंदरिया
चूहा = चुहिया बाछा = बछिया
खाट = खटिया कुत्ता = कुतिया

3. जब अक जैसे तत्सम शब्दों में ‘ इका ‘ जोडकर भी स्त्रीलिंग बनाए जाते हैं ।

तत्सम शब्द + इका = स्त्रीलिंग के उदहारण इस प्रकार हैं ।

अध्यापक + इका = अध्यापिका

पत्र + इका = पत्रिका

चालक + इका = चालिका

सेवक + इका = सेविका

लेखक + इका = लेखिका

 गायक + इका = गायिका

4. जब पुल्लिंग को स्त्रीलिंग बनाया जाता है तो कभी कभी नर या मादा लगाना पड़ता है ।

तोता = मादा तोता

खरगोश = मादा खरगोश

मच्छर = मादा मच्छर

जिराफ = मादा जिराफ

खटमल = मादा खटमल

मगरमच्छ = मादा मगरमच्छ

कोयल = नर कोयल

चील = नर चील

मकड़ी = नर मकड़ी

भेड़ = नर भेड़

मक्खी = नर मक्खी

गिलहरी = नर गिलहरी

5. कुछ शब्द स्वतंत्र रूप से स्त्री -पुरुष के स्वंय में ही जोड़े होते हैं । कुछ पुल्लिंग शब्दों के स्त्रीलिंग बिलकुल उल्टे होते हैं

सम्राट = सम्राज्ञी

मर्द = औरत

बैल = गाय

फूफा = बुआ

साहब = मेम

बिलाव = बिल्ली

पुल्लिंग + आनी/ आइन/ इन /नी /इनी = स्त्रीलिंग

6. कुछ शब्दों का स्त्रीलिंग न हो पाने की वजह से उनमें ‘ आनी ‘ प्रत्यय लगाकर स्त्रीलिंग बनाया जाता है ।

पुल्लिंग + आनी = स्त्रीलिंग

ठाकुर + आनी = ठकुरानी

सेठ + आनी = सेठानी

चौधरी + आनी = चौधरानी

देवर +आनी = देवरानी

इंद्र + आनी = इन्द्राणी

मेहतर + आनी = मेहतरानी

7. कभी कभी पुल्लिंग के कुछ शब्दों में ‘ इन ‘ जोडकर स्त्रीलिंग बनाया जाता है ।

पुल्लिंग + इन = स्त्रीलिंग

साँप + इन = सांपिन

सुनार + इन = सुनारिन

दर्जी + इन = दर्जिन

माली + इन = मालिन

8. कभी कभी बहुत से शब्दों में ‘ आइन ‘ जोडकर स्त्रीलिंग बनाए जाते हैं ।

पुल्लिंग + आइन = स्त्रीलिंग

चौधरी + आइन = चौधराइन

हलवाई + आइन = हलवाइन

गुरु + आइन = गुरुआइन

बाबू +आइन = बबुआइन

9. जब पुल्लिंग शब्दों में ता की जगह पर ‘ त्री ‘ लगा दिया जाता है तो वे स्त्रीलिंग बन जाते हैं ।

पुल्लिंग + त्री = स्त्रीलिंग

अभिनेता = अभनेत्री

रचयिता = रचयित्री

विधाता = विधात्री

वक्ता = वक्त्री

10. जब पुल्लिंग के जाति और भाव बताने वाले शब्दों में नी लगा दिया जाता है तो वे स्त्रीलिंग में बदल जाते हैं ।

पुल्लिंग शब्द + /नी = स्त्रीलिंग

सियार + नी = सियारनी

हिन्दू + नी = हिन्दुनी

भील + नी = भीलनी

हंस + नी = हंसनी

मोर + नी = मोरनी

हाथी + नी = हथिनी

 

11. पुल्लिंग शब्दों में जब ‘ इनी ‘ जोड़ दिया जाता है तो वे स्त्रीलिंग बन जाते हैं ।

पुल्लिंग शब्द + इनी = स्त्रीलिंग

तपस्वी + इनी = तपस्विनी

स्वामी + इनी = स्वामिनी

मनस्वी + इनी = मनस्विनी

अभिमान + इनी = अभिमानिनी

दंडी + इनी = दंडिनी

संन्यासी + इनी = संन्यासिनी

 

सुहास + इनी = सुहासिनी

पुल्लिंग = स्त्रीलिंग के उदहारण इस प्रकार हैं :-

12. संस्कृत के पुल्लिंग शब्दों मान और वान को जब वती और मति में बदल दिया जाता है तो वे स्त्रीलिंग में बदल जाते हैं ।

(i) बुद्धिमान = बुद्धिमती
(ii) पुत्रवान = पुत्रवती
(iii) श्रीमान = श्रीमती
(iv) भाग्यवान = भाग्यवती
(v) आयुष्मान = आयुष्मती
(vi) भगवान = भगवती
(vii) धनवान = धनवती आदि ।

अकारांत + आ = स्त्रीलिंग के उदहारण इस प्रकार हैं :-

13. संस्कृत के अकारांत शब्दों में आ लगा देने से वे स्त्रीलिंग हो जाते हैं ।

(i) तनुज + आ = तनुजा
(ii) चंचल + आ = चंचला
(iii) आत्मज + आ = आत्मजा
(iv) सुत +आ = सुता
(v) प्रिय + आ = प्रिया
(vi) पूज्य +आ = पूज्या
(vii) श्याम + आ = श्यामा
(viii) भैस + आ = भैंसा
(ix) भेड़ + आ = भेडा
(x) मौसी +आ = मौसा
(xi) जीजी + आ = जीजा आदि ।